Sep 5, 2018
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Top Sad Shayari in Hindi

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Who does not get sad in their life ? In every time of life we face failure, depression, negligence and because of many more such reasons we gradually become sad. But we should trust that life does not always stand against us. Such phases are for temporary duration. Just feel relaxed and let it pass by. Today we bring some of the sad shayari for you.

 

Kuch tanhai bewajah nahi hoti kuch dard aawaj chin liya karte hai

Meri har aah ko waah mile hai yaha, kaun kehta hai dard bikta nahi hai

Aiina koi aisa bana de e khuda jo insan ka chehra nahi

Insaan sab kuch copy paste kar sakta hai siqai kismat or naseeb ke

Ek tum hi na mil sake varna milne vale to bichhad bichhad ke mile

Teri nafrat ne ye kya sila diya mujhe, zeher gam-e-judai ke pila diya mujhe

Na koi hamdard tha, na hi koi dard tha, phi ek humdard mila usi se sara dard mila

Dil lagane se behtar hai ped lagai, vo ghav nahi kum se kum chav to dege
Vo

Vo mujh se dur rahkar khush hai aur mai usse khush dekhne ke liye dur hu

Jaisa mood ho vaisa manjar hota hai, mausam toh insan ke andar hota hai

Ek na ek din hasil kar hi lunga manzil thokare zahar hote nahi jo khakar mar javuga

Bahut taklif hoti hai jab tum sabse baat karte ho sirf mujhe chhod kar

Ye hai zindagi kuch tootay khwab kuch tooti umeedain

Uss dard se bhi dosti kar li hai maine jo kisi apne ne diya tha..

 

 

हमें सूरज की किरनें इस लिए तक़लीफ़ देती हैं
अवध की शाम काशी का सवेरा छोड़ आए हैं

हम अपने साथ तस्वीरें तो ले आए हैं शादी की
किसी शायर ने लिक्खा था जो सेहरा छोड़ आए हैं

मेरे वापस ना आने पर बहुत से लोग ख़ुश होंगे,
मगर कुछ लोग मेरा उम्र भर रस्ता भी देखेंगे ।

शेयर बाज़ार की क़ीमत उछलती गिरती रहती है,
मगर ये खून-ए-मुफ़लिस है कभी महंगा नहीं होगा !

ये दरवेशों कि बस्ती है यहाँ ऐसा नहीं होगा,
लिबास-ए-ज़िन्दगी फट जाएगा मैला नहीं होगा !

मुझे अपनी वफ़ादारी पे कोई शक नहीं होता
मैं खून-ए-दिल मिला देता हूँ जब झंडा बनाता हूँ

कभी शहरों से गुज़रेंगे कभी सेहरा भी देखेंगे,हम इस दुनिया में आएं हैं तो ये मेला भी देखेंगे ।

शुक्रिया तेरा अदा करता हूँ जाते-जाते
जिंदगी तूने बहुत रोज़ बचाया मुझको

सख़्त हैरत में पड़ी मौत ये जुमला सुनकर
आ, अदा करना है साँसों का किराया मुझको

जब कभी धूप की शिद्दत ने सताया मुझको
याद आया बहुत एक पेड़ का साया मुझको

एक तेरे न रहने से बदल जाता है सब कुछ
कल धूप भी दीवार पे पूरी नहीं उतरी

क्या ख़ौफ़ का मंज़र था तेरे शहर में कल रात
सच्चाई भी अख़बार में पूरी नहीं उतरी

सारे हवा में घोल दी है नफरतें और हवास अहल ए सियासत ने
मगर न जाने क्यों पानी कुँए का आज तक मीठा निकलता है
ये जो कलम दवात लिये कंधों पे फिरा करते हैं,
मर भी जाएं तो भी शायर नही होने वाले..!

गाँव की कच्ची मिटटी का समझ के बेच न देना इस घर को
शायद ये कभी सर और अबरुर को छुपाने के काम आए
इन गाव की घोर अँधेरी रात में अक्सर सुनहरी मशालें लेकर
मासूम परिन्दों की मुसीबत का पता ये जुगनू लगाते हैं

यह तो ठीक है तेरी जफ़ा भी है एक अता मेरे वास्ते,
मेरी दुआओं की कसम तुझे, कभी मुस्कुरा के भी देख ले.
हाय वो दौरे ज़िन्दगी, जिसका लक़ब शबाब था,
कैसी लतीफ़ नींद थी, कैसा हसीं ख़्वाब था

ग़ज़ल और शायरी की सल्तनत पर आज भी क़ब्ज़ा हमारा है
इसलिए तो हम अपने नाम के आगे अभी राना लगाते हैं
ख़ुद अपने आपको शादाब करना चाहता है,
ये कलम का फ़क़ीर आपको आदाब करना चाहता है !

माँ शायद इतने साल तक इसलिए जीवित रहीं क्योंकि मैं उन्हें धमकाता रहता था
तुम चली गई तो तुम्हारे पीछे-पीछे मैं भी चला आऊंगा।

तुम्हारी महफिलों में हम बड़े बूढ़े जरूरी हैं,
अगर हम ही नहीं होंगे तो पगड़ी कौन बांधेगा !

दिल में अरमान तो लाखों हैं
पूरे मगर ये होते नहीं
हँसते हैं साथ सब खुशियों में
ग़म में मगर संग रोते नहीं।

मिलेगा कुछ नहीं तुमको
न माँ गो हाथ फै लाकर
मुझे इतना तो बतलाना
क्या पाया है यहाँ आकर।

नज़रें मेरी राहों पे लगी है।
कि हज यार कभी तो मैं आएगा
किया है कितना इंतज़ार मैंने
ये रास्ता उसको बताएगा।

गिला बस इसका है मुझको
मैं कुछ भी कह नहीं पाया
मेरी कमज़ोरी ही कह लो
तेरे बिन रह नहीं पाया।

ये पत्थरों का शहर है सारा
किसी को किसी की पहचान नहीं
रहते हैं यहाँ शैतान ही अब
यहाँ बचा कोई भी इन्सान नहीं।

भले आज बदल डाला खुद को मगर
यह सच्च है कि मुझको भी प्यार था कभी
ना कोई संकोच है ये कहने में मुझको
कि मुझको भी उनका इंतजार था कभी।

क्या मुस्कुरा पाऊँगा मैं क भी
बस बैठा यही सोचता रहता हूँ
किसी और का दोष नहीं इसमें
बस खुद को ही कोसता रहता हूँ।

दिल के किसी कोने में रहता हूं मैं
ना दिल लगाना तुम सबसे कहता हूं मैं
मैं हूं प्यार जो ग़र रूठ जाए तो
बनके अश्क आंखों से बहता हूं मैं।

तेरे ग़म से ऐ दोस्त अनजान नहीं हूं मैं
तेरा अपना हूँ कोई मेहमान नहीं हूं मैं
कहने को कहो कुछ भी सह लूँगा सब मगर
इतना जरूर है दोस्त नादान नहीं हूं मैं।

सबको किस्मत से है शिकायत
सब अपनों से खफा लगते हैं
वफादारी निभाते देखा न किसी को
खुद को ही सब यहाँ ठगते हैं।

मुबारक तुझको ये दुनिया
नहीं मुझको समझ इसकी
वो मुझको छोड़ जाता है
कद्र करता हू मै जिसका।

बहुत रोती हैं ये आंखें
ये दिल भी रोता है मेरा
न बाकी कु छ रहा मुझमें
न बिगड़ा कु छ सनम तेरा।

वो देता राम रहा मुझको
न जिद मैंने भी छोड़ी है
कमा कर राम की ये दौलत
यूं भर रखी तिजौरी है ।

वफ़ा का नाम लेकर दोस्त,
वो बेवफाई का खंजर आजमाते हैं ॥
जख्मी दिल है पास मेरे,
वो फिर भी ठेस पहुंचाते है।

न फितरत ये रही मेरी
कि आगे हाथ फैलाऊँ
है इससे अच्छा तो नहीं
इसी पल मर न क्यूँ जाऊ ।

मुझे भी आ गया जीना
ये जबसे चोट खाई है
गमों संग अच्छा लगता है
खुशी लगती पराई है ।

वफा माथे पर लट लहराती है,
चूड़ी की खनक बुलाती है ।
रुखसारों पे है हया न का पर्दा,
चाहत फिर भी उसे सताती है ।

लोग हमारी मौत की दुआ मांगते हैं,
हम बेशर्मी से जीये जाते हैं ।
उनकी तमन्ना है जनाजा देखने की,
हम खड़े होकर मुस्कुराते जाते हैं ॥

ऐ बेवफा थाम ले मुझको मजबूर हूँ कितना
मुझको सजा न दे मैं बेकसूर हूँ कितना
तेरी बेवफ़ाई ने कर दिया है मुझे पागल
और लोग कहतें हैं मैं मगरूर हूँ कितना

उनकी चाहत तो हम भी रखते हैं
हो न हो लेकिन हम भी उनके दिल मे धड़कते हैं
वो हमें याद करें या न करें
लेकिन हम तो सिर्फ उनके लिए ही तड़पते हैं

ज़िन्दगी की भीड़ में अकेले रहे गए
उसकी जुदाई में आँसुओ के दरिया बह गए
अब हमें कौन चुप कराने वाला है
जो चुप कराते थे वही रोने को कहे गए

उनके गम में मेरी आँखें नम हो जाती हैं
लेकिन फिर भी होटों पे हंसी लानी पड़ती है
मोहब्बत तो हमने बस एक से की थी
लेकिन ये मोहब्बत जमाने से छुपानी पड़ती है

फूलों में भी काटें होते हैं
क्यों मोहब्बत करने वाले रोते हैं
ज़िन्दगी भर तड़पते है इश्क करने वाले
और तड़पाने वाले चैन से सोते हैं

उम्र भर के गमो का पैगाम दे गया
हमे तो वो वेबफा का इल्ज़ाम दे गया
चाहा था जिसे कभी टूटकर हमने
वही हमे तन्हाईयों के सैलाब दे गया

वो हम पर हर इल्ज़ाम लगाते हैं
वो हर ख़ता हमे बताते है
हम तो बस चुप रहतें है क्योंकि
वो हम पे अपना हक जताते हैं

इस दुनिया से तो हम रिश्ता तोड़ जाएंगे
तेरे यादों का एक शहर छोड़ जाएंगे
वेबफा तू मुझे सताएगा कितना
एक दिन तुझसे हमेशा के लिए मुह मोड़ जाएंगे

मुझे उससे कोई शिकवा नही न ही गिला है
मेरे दर्द की अब न ही कोई दवा है
बहुत आँसू बहाये है उसके लिए
जिसे खुदा ने मेरे लिये बनाया ही नही है

हमने रस्म रिवाज़ों से बग़ावत की है
हमने वेपन्हा उनसे मोहब्बत की है
दुआओं में जिसे था कभी मांगा
आज उसी ने जुदा होने की चाहत की है

ऐ बेवफा सांस लेने से तेरी याद आती बहुत है
ऐ बेवफा सांस न लूँ तो भी मेरी जान जाती है

मैं कैसे कह दूं कि मैं सांस से जिंदा हूँ मै
ये सांस भी तो तेरी याद आने के ही बाद आती है

 

 

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